अगर हम यह सोचते और मानते हैं कि धर्म, संप्रदाय या जाति के नाम पर विवाद सिर्फ हमारे देश में ही होता है, तो हम गलत है। मानवता को शर्मसार करने वाली यह घटना दो अक्टूबर की है।
उस दिन इस्राइल की पुलिस नें एक 13 साल के एक फिलिस्तीनी मासूम को ऐदा रिफ्यूजी कैंप में गोली मार दी। पुलिस के अनुसार पुलिस को शक था कि उस लड़के पास जानलेवा हथियार था। इस वजह से पुलिस ने नजदीकी रेंज से उसे गोली मार दी
चश्मदीदों के अनुसार वह लड़का उसी वक्त जमीन पर गिर गया। खून इतना बह गया कि उसने अपनी जान गंवा दी। सांसो के लिए तड़पतें और दर्द से करहाते हुए, वो बच्चा खुद को जरा भी न हिला सका। वहां खड़े यहूदियों ने उसकी मदद करना तो दूर, उसे गालियां देना शुरू कर दिया।
उस लड़के का नाम हसन मनास्रेह है। फिलिस्तीन के इस लड़के साथ यह हादसा. बेतलेहेम से दो किलोमीटर दूर, ऐदा कैंप में हुई। ऐसे विवादों में सिर्फ दो ही चीजों की हार होती है। पहली है इंसानियत और दूसरी है जिंदगी
बहरहाल, कमजोर जहनियत की ऐसी घटनाएं, इंसानियत को शर्मसार करती है। ऐसे विवादों से हमें संयम और शांति की जरूरत है। उम्माद है कि आने वाले कल में किसी की जान लेना इतना आसान तो नहीं होगा...
उस दिन इस्राइल की पुलिस नें एक 13 साल के एक फिलिस्तीनी मासूम को ऐदा रिफ्यूजी कैंप में गोली मार दी। पुलिस के अनुसार पुलिस को शक था कि उस लड़के पास जानलेवा हथियार था। इस वजह से पुलिस ने नजदीकी रेंज से उसे गोली मार दी
चश्मदीदों के अनुसार वह लड़का उसी वक्त जमीन पर गिर गया। खून इतना बह गया कि उसने अपनी जान गंवा दी। सांसो के लिए तड़पतें और दर्द से करहाते हुए, वो बच्चा खुद को जरा भी न हिला सका। वहां खड़े यहूदियों ने उसकी मदद करना तो दूर, उसे गालियां देना शुरू कर दिया।
उस लड़के का नाम हसन मनास्रेह है। फिलिस्तीन के इस लड़के साथ यह हादसा. बेतलेहेम से दो किलोमीटर दूर, ऐदा कैंप में हुई। ऐसे विवादों में सिर्फ दो ही चीजों की हार होती है। पहली है इंसानियत और दूसरी है जिंदगी
बहरहाल, कमजोर जहनियत की ऐसी घटनाएं, इंसानियत को शर्मसार करती है। ऐसे विवादों से हमें संयम और शांति की जरूरत है। उम्माद है कि आने वाले कल में किसी की जान लेना इतना आसान तो नहीं होगा...


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